Wednesday, December 7, 2016

आज भी....

है प्यार दील मैं तुम्हारा......
आज भी वैसे ही!!

धड़कता है दील तेरे लीये.....
आज भी वैसे ही!!!

खोने का दर्द आखों मैं सुखता है ....
आज भी वैसे ही!!!

जाते तूम्हे देख सांस मेरी थमती है....
आज भी वैसे ही!!!

खुशबू तेरी सवेरों में मेरी है......
आज भी वैसे ही!!!

खोकली रातें करवट बदलती रहती है...
आज भी वैसे ही!!!

तेरे छुने के एहसास मुझको है....
आज भी वैसे ही!!!

तरसती है आरज़ू मेरी, तेरे लीये.....
आज भी वैसे ही!!!

खुद से ज्यादा वादों पे तेरे, भरोसा है....
आज भी वैसे ही!!!

जुदाई के उसी वादे पर.. मैं कायम....
तोडेगी, मेरे लीये..उम्मिद मुझको!
आज भी वैसे ही!!!
तोडेगी, मेरे लीये..उम्मिद मुझको!
आज भी वैसे ही!!!

Wednesday, October 12, 2016

आंखें

टकराया उससे सालों बाद....
दोस्तों की नयी मेहफिल में....
अचानक सामने आंखें वो आयी!!!
वही कशिश जिंदगी पीछे ले गयी।

नज़र झुकी आज भी वैसे
हाथ मिलाया मैंने जब उससे
उन्ही सवालो से भरी आंखें
और पलकों में क़ैद यादें

आँखों में वोह सपने
आज भी है वही ठहरे....... 
वक़्त के बहाव में खाली
जिंदगी बेमतलब सी बहे!!!

उठे आज मेरी तरफ वह आँखें
प्यार मेरा सिमट ले आये
खामोश होठों ने है लफ्ज़ सिये
आँखें ही बस खाली शोर मचाये

सैलाब से दिल में मौजे उठती
आँखों के तीर,  हद है उनकी
हद टोड कर बेहना हो जब
मुस्कुराहट सागर बाहर छलकती!!!

उन आँखों के लिए मर जाना चाहता हूँ
जल कर में, यु ख़ाक बनना चाहता हूँ
आंसू बनकर उसकी आँखों से....
हर दम के लिए अब बेह जानना चाहता हूँ!!!
हर दम के लिए अब बेह जानना चाहता हूँ!!!!

Tuesday, September 27, 2016

हम तो बेऔलाद ही अच्छे

नहीं धड़केगी हमारी धड़कन सामने
नहीं देखेगी कोई विश्वास भरी आँखें
नहीं शायद रेंगेगी खुसी पुरे घर में
नहीं समाएगी पूरी दुनिया इन बाँहों में!!!

न शोर कोई होगा अपना सा घर में
न किंकरियों के कभी आलाप  सुने हमने
न कभी जलेगी रातें इन आँखों में
खिल-खिलाते हुए न होंगे कभी सवेरे!!!!

हर आशा, जज़बात, हर ख़ुशी में झलकता!!!
न होते हुए भी हमारे हर पल में वह था...
रुकी जिंदगी एक उसी मोड़ पर
वक़्त गुजरता रहा हमें खोकला कर!!!

जाना, ममता तो है, एक एहसास
हर जोड़े के मन का विश्वास
न जोड़े इस एहसास को खून से.......
या किसी के तन की काबिलियत से!!!!

घर के साथ-साथ मन के दर खोले
ममता के भी, फिर खुले दायरें
रखा जब यतीम के सर पर हाथ
बहने लगी ममता से आँख!!!

माना हुए थे हम पुरे
अनेक खड़े पीछे अब भी अधूरे
एक में कितना क्यों हम जीते
बजाय कतरा-कतरा अब हम इन सब में है जीते!!!

गलत नहीं बस अलग है हम....
अपूर्ण नहीं पुरे पूर्ण है हम..
जीने के अपने अपने मायने
हम तो बेऔलाद ही अच्छे!!!!!
हम तो बेऔलाद ही अच्छे!!!!!

Wednesday, August 31, 2016

आज़ाद

घोसलों पर नज़र गड़ाई, पर उड़ान आज़ाद है
डोर ज़मीन से जुडी पर, पतंग की ऊंचाई आज़ाद है!!!!

गले में बंद सुर, रियाज़ मिले तो गीत आज़ाद है
वाद्य में बंद साज, वादक छेड़े तो संगीत आज़ाद है....

नदियों की मंज़िल सागर, बेहना फिर भी आज़ाद है....
मौजों की मंज़िल किनारा, मगर रवानी आज़ाद है!!!!

सोच के दायरों में विश्व मेरा, उन्मुक्त करु तो आज़ाद है....
आँखों से सिमित है दृष्टी, बंद करु तो आज़ाद है!!!!

मुट्ठी में बंद किस्मत, मेहनत मिले तो आज़ाद है....
बीजो में बसे खेत, बोये तो फसल आजाद है!!!

कली बंधी डाली से, खिले तो खुसबू आज़ाद है......
एहसास कितने जेहेन में, अलफ़ाज़ खिले तो शायरी आज़ाद है!!

दरिया-दिली पर बांध कितने, दर खोलू तो आज़ाद है...
दिल में क़ैद प्यार जितना, जाहिर करो तो आज़ाद है!!!

मन में बसे रावण को, राम जिले तो आज़ाद है...
रूह बंधी जिस्म से, मौत मिले तो आज़ाद है!!!

Monday, August 15, 2016

आज़ादी है

आज़ादी है भाई.... हमें तो आज़ादी है!!!
रूह जिन्दा हो न हो, सांस लेने की पर आज़ादी है!!!


बाह्य खूबसूरत हो न हो, मैले मन की आज़ादी है....
क्षमाशील हो न हो, सजा देने की आज़ादी है !!!!

विवेक हो न हो, मत देने की आज़ादी है....
इन्साफ हो न हो, न्याय सुनाने की आज़ादी है!!

जानकारी हो न हो, राय देने की आज़ादी है....
निष्कलंक हो न हो, ऊँगली उठाने की आज़ादी है!!!!


सशक्तिकरण  हो न हो, शक्ति के इस्तिमाल की आज़ादी है....
शासन हो न हो, शासक बनने की आज़ादी है!!!!!

काबिल हो न हो,  कामयाबी की आज़ादी है.....
साथ कोई हो न हो, बढ़ते रहने की आज़ादी है!!!!

श्रद्धा हो न हो, इबादत की आज़ादी है....
मजहबी हो न हो, क़त्ल-ए-आम की आज़ादी है!!!!!

पुण्यात्मा हो न हो, पुण्य परिभाषित करने की आज़ादी है.... 
अनुरागी हो न हो, ज़हरी नफरत की आज़ादी है!!!

दानी हो न हो, छीनने की आज़ादी है....
"हम" ये सोच हो न हो, "अहम" की आज़ादी है!!

बोना  आता हो न हो, कटाई की आज़ादी है....
रचनाकार हो न हो, रौंदने की आज़ादी है!!!!

आज़ादी है हमको,  आज़ादी है
अच्छाई क़ब्ज़ियत कर, बुराई की आज़ादी है
अच्छाई क़ब्ज़ियत कर, बुराई की आज़ादी है!!!!!!

Wednesday, August 3, 2016

माँग

माँगना था उसे कुछ उस दिन.....
झिझक रही थी बड़ी वो कमसिन
पता नहीं क्यों झीझक रही थी
ऐसी कौनसी चीज़ जो उसकी नहीं थी!!

कहाँ उससे मांगो बस अब
जहाँ से लेकर जाँ तक सब!!!!
आँखें में प्यार और मन कर सख्त
मुझसे खुद को ही मांग बैठी कमबख्त!!!

रातों की मेरे, चांदनी मांगली
सवेरों से मेरी, आशाएं मांगली
बाग़बान जिंदगी से, अपनी बहार मांगीली
झरोखों में सजी, सृष्टि मांगली....

होने का मेरी, वजह मांगली
मन खोकला कर, मुरादे मांगली
बिखरे बिस्तर खाली, अपनी खुशबु मांगली
घरौंदा पत्थर कर, सारी मोहब्बत मांगली!!!

लूट कर, खड़ा रहा बाजार में..
ओझल हो गयी पर वो भीड़ में
स्तंभित खड़ा रहा इंकार में
झूठी आशा बस बची थे मुझे में!!!

खड़े होकर फिर क्यों गिरता हूँ....
मरहम अपना उसी में  क्यों ढूंढता हूँ
सासों में अपनी खुद क्यों जिन्दा करता हूँ
बिख़िरी रूह मेरी, आज भी क्यों सवरता हूँ
बिख़िरी रूह मेरी, आज भी क्यों सवरता हूँ

Tuesday, June 21, 2016

चला आ गया.......

आ रहा हूँ, अपनी ही जिंदगी में.....
एक अपनी ही जिंदगी पीछे छोड़ कर!!!!

घर लौट आया अपने, अपना ही कोई घर छोड़ कर!!
कुछ अपनों के पास, कई और अपनों को छोड़ कर....

नए रिश्तों को निभाने, कुछ दिलों को जलता छोड़ कर!
नयी दोस्ती के खातिर मगर, कई पुराने दोस्त छोड़ कर!!

नए सपनो के पास, हकीकत भरे आज को छोड़ कर.....
नयी उम्मीदों की आस में, कुछ पुराणी उम्मीदें तोड़ कर!!!

नयी ज़मीन को अपनाने, अपनी जमीन को छोड़ कर.....
नया आस्मां छूने, पुराने सितारे छोड़ कर!!!!!

नयी हरयाली की तलाश में, अपनी ही छाव छोड़ कर.....
नए लहरों पे बहते, अपने ही किनारे छोड़ कर!!!

मुलायम बिस्तर की आस में, अपनों की नींदें तोड़ कर....
नरम तकिए के आस में, महफूज़ गोद को छोड़ कर!!!

नए लम्हों को जीने, कुछ दास्तानें अधूरी छोड़ कर.....
नए किस्से की यादें बनाने,  पुरानी यादें सुलगती छोड़ कर!!!

नए अस्तित्व की तलाश में, पुरानी पहचान छोड़ कर!!
नयी तृप्ति की और, कुछ अतृप्तियों को तरसती छोड़ कर....

चला आ  गया हूँ अब, मेरी नयी जिंदगी में.....
एक मेरी ही जिंदगी, पीछे छोड़ कर!!!!
एक मेरी ही जिंदगी, पीछे छोड़ कर!!!!