Wednesday, October 12, 2016

आंखें

टकराया उससे सालों बाद....
दोस्तों की नयी मेहफिल में....
अचानक सामने आंखें वो आयी!!!
वही कशिश जिंदगी पीछे ले गयी।

नज़र झुकी आज भी वैसे
हाथ मिलाया मैंने जब उससे
उन्ही सवालो से भरी आंखें
और पलकों में क़ैद यादें

आँखों में वोह सपने
आज भी है वही ठहरे....... 
वक़्त के बहाव में खाली
जिंदगी बेमतलब सी बहे!!!

उठे आज मेरी तरफ वह आँखें
प्यार मेरा सिमट ले आये
खामोश होठों ने है लफ्ज़ सिये
आँखें ही बस खाली शोर मचाये

सैलाब से दिल में मौजे उठती
आँखों के तीर,  हद है उनकी
हद टोड कर बेहना हो जब
मुस्कुराहट सागर बाहर छलकती!!!

उन आँखों के लिए मर जाना चाहता हूँ
जल कर में, यु ख़ाक बनना चाहता हूँ
आंसू बनकर उसकी आँखों से....
हर दम के लिए अब बेह जानना चाहता हूँ!!!
हर दम के लिए अब बेह जानना चाहता हूँ!!!!

No comments: