स्वतंत्रता दिन का सुरज उदय हुआ...
1947 की दास्ताँ बयां करने...
चाँद-सितारों से जानकर, उस रात की कहानी..
उसे "उस" सुबह देर हुई थी ......आते आते!!!!
सुनाने है उसे उन देश प्रेमियों के किस्से...
बताने है उसको उन लोगों ने देखे सपने....
बाटना चाहता है उनके दिलों के अरमान!!!.
वोही तो है जिसने देखा था सारा!!!
तिलक, गाँधी, भगत सिंग को देखा था यहाँ!!!
अपनी रौशनी में ढूंड रहा है उनको यहाँ....
रौशनी तेज़ किया तो मिले उसे सभी..
पुस्तकों में छुपे थे सारे.... डरे, सहमे हुए!!!
सूरज ने बताया उनकी जरुरत है बाहर!!
मेरे होते हुए भी अँधेरा है गहरा!!!!
सत्य को यहाँ असत्य प्रमाणित कर रहा है....
हिंसा हर समस्या का समाधान बन रही है!!!!!
देखो!!! शिवाजी के भेस में अफज़ल खान घूम रहे है..
झाँसी की रानी देखो.. अपनों से ही लढ़ रही है!!!
सीधांतो की लाश, दीवारों पे टंगी मिलती है...
नेताओं के "आदर्श" ही बदल गए है!!!
सूरज हँसके बोला तुम्हारी कहानी सुनाने चला था
जिनकी कहानी अपनों ने ही ख़तम कर दी!!!
मस्रुफ है लोग अपनी जिंदगी सवारने में..
देश को आजाद किया है .....अपनी ही जिंदगी से!!!!
1947 की दास्ताँ बयां करने...
चाँद-सितारों से जानकर, उस रात की कहानी..
उसे "उस" सुबह देर हुई थी ......आते आते!!!!
सुनाने है उसे उन देश प्रेमियों के किस्से...
बताने है उसको उन लोगों ने देखे सपने....
बाटना चाहता है उनके दिलों के अरमान!!!.
वोही तो है जिसने देखा था सारा!!!
तिलक, गाँधी, भगत सिंग को देखा था यहाँ!!!
अपनी रौशनी में ढूंड रहा है उनको यहाँ....
रौशनी तेज़ किया तो मिले उसे सभी..
पुस्तकों में छुपे थे सारे.... डरे, सहमे हुए!!!
सूरज ने बताया उनकी जरुरत है बाहर!!
मेरे होते हुए भी अँधेरा है गहरा!!!!
सत्य को यहाँ असत्य प्रमाणित कर रहा है....
हिंसा हर समस्या का समाधान बन रही है!!!!!
देखो!!! शिवाजी के भेस में अफज़ल खान घूम रहे है..
झाँसी की रानी देखो.. अपनों से ही लढ़ रही है!!!
सीधांतो की लाश, दीवारों पे टंगी मिलती है...
नेताओं के "आदर्श" ही बदल गए है!!!
सूरज हँसके बोला तुम्हारी कहानी सुनाने चला था
जिनकी कहानी अपनों ने ही ख़तम कर दी!!!
मस्रुफ है लोग अपनी जिंदगी सवारने में..
देश को आजाद किया है .....अपनी ही जिंदगी से!!!!