वोह बड़ी मासूमियत से पूछ बैठे
की हम उनसे इतना प्यार क्यू करते है........
जिसे देख, थकान को भी स्फूर्ति आती है...
जिसकी नज़रों में जिंदगी मेह्फूज नजर आती है....
जिसके हाथ थामते ही सफ़र खुशनुमा होता है...
जिसकी हसी में मेरी ही ख़ुशी झलकती है...
जिसकी बातों में सिवाय प्यार और कुछ होता ही नहीं है...
जिसके आंखो से दर्द हमेशा दुसरे का बेहता है...
जिसके प्यार के स्पर्श से जिंदगियां सवर जाती है...
जिसे ख़ूबसूरती अपनी परिभाषा मानती है......
जिसे फुल भी अपनी मासुमियात चुराते है......
इसलिए उनसे इतना प्यार करते है ...
इसलिए उनसे इतना प्यार करते है
की हम उनसे इतना प्यार क्यू करते है........
जिसे देख, थकान को भी स्फूर्ति आती है...
जिसकी नज़रों में जिंदगी मेह्फूज नजर आती है....
जिसके हाथ थामते ही सफ़र खुशनुमा होता है...
जिसकी हसी में मेरी ही ख़ुशी झलकती है...
जिसकी बातों में सिवाय प्यार और कुछ होता ही नहीं है...
जिसके आंखो से दर्द हमेशा दुसरे का बेहता है...
जिसके प्यार के स्पर्श से जिंदगियां सवर जाती है...
जिसे ख़ूबसूरती अपनी परिभाषा मानती है......
जिसे फुल भी अपनी मासुमियात चुराते है......
इसलिए उनसे इतना प्यार करते है ...
इसलिए उनसे इतना प्यार करते है