नहीं धड़केगी हमारी धड़कन सामने
नहीं देखेगी कोई विश्वास भरी आँखें
नहीं शायद रेंगेगी खुसी पुरे घर में
नहीं समाएगी पूरी दुनिया इन बाँहों में!!!
न शोर कोई होगा अपना सा घर में
न किंकरियों के कभी आलाप सुने हमने
न कभी जलेगी रातें इन आँखों में
खिल-खिलाते हुए न होंगे कभी सवेरे!!!!
हर आशा, जज़बात, हर ख़ुशी में झलकता!!!
न होते हुए भी हमारे हर पल में वह था...
रुकी जिंदगी एक उसी मोड़ पर
वक़्त गुजरता रहा हमें खोकला कर!!!
जाना, ममता तो है, एक एहसास
हर जोड़े के मन का विश्वास
न जोड़े इस एहसास को खून से.......
या किसी के तन की काबिलियत से!!!!
घर के साथ-साथ मन के दर खोले
ममता के भी, फिर खुले दायरें
रखा जब यतीम के सर पर हाथ
बहने लगी ममता से आँख!!!
माना हुए थे हम पुरे
अनेक खड़े पीछे अब भी अधूरे
एक में कितना क्यों हम जीते
बजाय कतरा-कतरा अब हम इन सब में है जीते!!!
गलत नहीं बस अलग है हम....
अपूर्ण नहीं पुरे पूर्ण है हम..
जीने के अपने अपने मायने
हम तो बेऔलाद ही अच्छे!!!!!
हम तो बेऔलाद ही अच्छे!!!!!
नहीं देखेगी कोई विश्वास भरी आँखें
नहीं शायद रेंगेगी खुसी पुरे घर में
नहीं समाएगी पूरी दुनिया इन बाँहों में!!!
न शोर कोई होगा अपना सा घर में
न किंकरियों के कभी आलाप सुने हमने
न कभी जलेगी रातें इन आँखों में
खिल-खिलाते हुए न होंगे कभी सवेरे!!!!
हर आशा, जज़बात, हर ख़ुशी में झलकता!!!
न होते हुए भी हमारे हर पल में वह था...
रुकी जिंदगी एक उसी मोड़ पर
वक़्त गुजरता रहा हमें खोकला कर!!!
जाना, ममता तो है, एक एहसास
हर जोड़े के मन का विश्वास
न जोड़े इस एहसास को खून से.......
या किसी के तन की काबिलियत से!!!!
घर के साथ-साथ मन के दर खोले
ममता के भी, फिर खुले दायरें
रखा जब यतीम के सर पर हाथ
बहने लगी ममता से आँख!!!
माना हुए थे हम पुरे
अनेक खड़े पीछे अब भी अधूरे
एक में कितना क्यों हम जीते
बजाय कतरा-कतरा अब हम इन सब में है जीते!!!
गलत नहीं बस अलग है हम....
अपूर्ण नहीं पुरे पूर्ण है हम..
जीने के अपने अपने मायने
हम तो बेऔलाद ही अच्छे!!!!!
हम तो बेऔलाद ही अच्छे!!!!!