Tuesday, June 21, 2016

चला आ गया.......

आ रहा हूँ, अपनी ही जिंदगी में.....
एक अपनी ही जिंदगी पीछे छोड़ कर!!!!

घर लौट आया अपने, अपना ही कोई घर छोड़ कर!!
कुछ अपनों के पास, कई और अपनों को छोड़ कर....

नए रिश्तों को निभाने, कुछ दिलों को जलता छोड़ कर!
नयी दोस्ती के खातिर मगर, कई पुराने दोस्त छोड़ कर!!

नए सपनो के पास, हकीकत भरे आज को छोड़ कर.....
नयी उम्मीदों की आस में, कुछ पुराणी उम्मीदें तोड़ कर!!!

नयी ज़मीन को अपनाने, अपनी जमीन को छोड़ कर.....
नया आस्मां छूने, पुराने सितारे छोड़ कर!!!!!

नयी हरयाली की तलाश में, अपनी ही छाव छोड़ कर.....
नए लहरों पे बहते, अपने ही किनारे छोड़ कर!!!

मुलायम बिस्तर की आस में, अपनों की नींदें तोड़ कर....
नरम तकिए के आस में, महफूज़ गोद को छोड़ कर!!!

नए लम्हों को जीने, कुछ दास्तानें अधूरी छोड़ कर.....
नए किस्से की यादें बनाने,  पुरानी यादें सुलगती छोड़ कर!!!

नए अस्तित्व की तलाश में, पुरानी पहचान छोड़ कर!!
नयी तृप्ति की और, कुछ अतृप्तियों को तरसती छोड़ कर....

चला आ  गया हूँ अब, मेरी नयी जिंदगी में.....
एक मेरी ही जिंदगी, पीछे छोड़ कर!!!!
एक मेरी ही जिंदगी, पीछे छोड़ कर!!!!

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