Wednesday, August 31, 2016

आज़ाद

घोसलों पर नज़र गड़ाई, पर उड़ान आज़ाद है
डोर ज़मीन से जुडी पर, पतंग की ऊंचाई आज़ाद है!!!!

गले में बंद सुर, रियाज़ मिले तो गीत आज़ाद है
वाद्य में बंद साज, वादक छेड़े तो संगीत आज़ाद है....

नदियों की मंज़िल सागर, बेहना फिर भी आज़ाद है....
मौजों की मंज़िल किनारा, मगर रवानी आज़ाद है!!!!

सोच के दायरों में विश्व मेरा, उन्मुक्त करु तो आज़ाद है....
आँखों से सिमित है दृष्टी, बंद करु तो आज़ाद है!!!!

मुट्ठी में बंद किस्मत, मेहनत मिले तो आज़ाद है....
बीजो में बसे खेत, बोये तो फसल आजाद है!!!

कली बंधी डाली से, खिले तो खुसबू आज़ाद है......
एहसास कितने जेहेन में, अलफ़ाज़ खिले तो शायरी आज़ाद है!!

दरिया-दिली पर बांध कितने, दर खोलू तो आज़ाद है...
दिल में क़ैद प्यार जितना, जाहिर करो तो आज़ाद है!!!

मन में बसे रावण को, राम जिले तो आज़ाद है...
रूह बंधी जिस्म से, मौत मिले तो आज़ाद है!!!

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