Wednesday, January 23, 2013

तेरी एक हसी...

तेरी हसी से जब भी गूंजी है जिंदगी...
ख़ुशी का एहसास तभी दिलाइ है जिंदगी!!!
खामोश, तन्हा जिंदगी ने जब भी रुलाया है...
तेरी हसी की गूंज ने ही फिर हसाया है!!!!!

अमावस की रात जगमगाते जुगनू की तरह।।
गर्मियों में बहने वाली ठंडी पुरवाईयो की तरह!!!
बरसात में मिट्टी की सौंधी खुसबू की तरह।।
सागर के लेहेराते, बलखाते मौजो की तरह!!!

जब जब ये सारा महसूस किया है।।
हसी का तेरे मुझे एहसास हुआ है!!!

काले घने बादलों को चीरती उस किरन की तरह।
बे मौसम अचानक गिरती हुई बरसात की तरह!!!
आसमान में चमकने वाली उस बिजली की तरह।
बारिश ने खिलाई हुई हरियाली की तरह!!!!

मौसम को जब भी यु मुस्कुराते हुए देखा।।
तुझे ही उन सब में मुस्कुराते हुए पाया।।

तार से निकली किसी सुरीली सरगम की धुन ।।।
बजते हुए किसी मासूम पायल की छुन-छुन !!!!!
वीरान पहाड़ों से गिरते झरने की गुंजन।
या छत पर बजते हुए बारिश के जलतरन !!

जब भी सुनी ये आवाज़े कहीं।।
तू हस रही थी शायद वहीं कही।

मंजर ये सारे आज भी वैसे ही हस्ते है
सुनने को खाली ये आवाज़े रह गयी है
हस्ते हुए तुझे आज देखता ही कहाँ हूँ!!!
हसी की गूंज तेरी इन में ही ढूँढता हूँ!!!

क्या कभी लौटेगी तुम्हारी वो हसी।
कैसे मिलेगी उसे जिंदगी नयी!!
खामोश, तन्हा, वीराने आज भी रुलाते है...
तेरी उस हसी की तलाश में आज भी भटकते है !!!!!
तेरी उस हसी की तलाश में आज भी भटकते है !!!!!

1 comment:

Vids said...

Awesome!! Simply BEAUTIFUL Ash..very well composed..keep it up :))