Monday, February 10, 2014

..... क्यों की तुम ही हो!!!!!!

जीवन में नहीं मगर जीवन के मायने हो तुम.…
सुकून में नहीं  मगर संघर्ष में हो तुम.. 
हर पल में नहीं मगर तन्हाईयों में हो तुम.…
मुस्कराहट में नहीं मगर हर आंसू में हो तुम!!!!!

नतीजो में नहीं मगर उनके इम्तिहानो में हो तुम…
कामयाबी में नहीं मगर असफलताओं में हो तुम
हौसलों में नहीं मगर कमजोरियों में हो तुम..... 
मंज़िल तो नहीं मगर वीरानी राहों में हो तुम!!!!

निश्चय में नहीं मगर समझौतो में हो तुम.…
वादों, कसमों में नहीं मगर उनके टूटने में हो तूम
बातों में नहीं मगर जेहेन में हो तुम.… 
पास हो कर भी मगर खली-पन के एहसास में हो तुम!!!!!

सावन कि रिमझिम में नहीं मगर उसके प्यास में हो तुम.....
निवालों में नहीं मगर उनकी भूक में हो तुम!!!!
वादियों के गूंजने में नहीं मगर दिल चीरते सन्नाटों में हो तुम.....
जलते दीपक में नहीं मगर अंधकार में हो तुम!!!!!

मेरे वर्तमान में नहीं मगर कतरा-कतरा सुलगती यादों में हो तुम.…
नींदों में नहीं मगर खुली आँखों के सपनो में हो तुम
शराब के प्यालो में नहीं मगर चढ़ते नशे में हो तुम.....
पहेली किरन में नहीं मगर डूबते सूरज में हो तुम!!!!!

इबादत में नहीं मगर मेरे रब में हो तुम.…
सिर्फ जेहेन में नहीं मगर रूह में बसे हो तुम!!!!!
सिर्फ जेहेन में नहीं मगर रूह में बसे हो तुम!!!!!


1 comment:

Vids said...

wahh wahh..kya baat hain :)
Stupendous!!