संधीप्रकाशात.... जिंदगी मेरी अब खर्च हुई सारी...आया है वो पल...... हिसाबों का!!!!जब भी देखी अब अक्स में कोई छायातेरा ही प्रतिबिम्ब ... प्यारा प्यारा!!! सुखी जीवन में मेरी जिंदगी कैद जैसे..मौत ही खोले अब.... द्वार इसके!!! सिंदुरी ये साँझ ढलते ढलते..... पलके मेरी बंद हो.... धीरे धीरे!!!करीब रहना, खुबसूरत ख्वाब के जैसे... चैन से बंद होगी तब ये मेरी सासे..... तुमसे महेकती है बाहारें तेरे आंगन में...उसी आँगन की खिली तुलसी, हो मेरे मृत-मुख में... तुमने खीचा हुआ मुझे पिलाना पानी.पवित्र दूसरा जल दुनिया में नहीं... सूखे होठों तब रखना, तेरे बिदाई के फूल… मदहोश उस स्पर्श से अंतिम बार.…. रुखसत लू दुनीया के उस पार!!!!!
Original Poem By: B.B BorkarMusic and Singer : Salil Kulkarni
1 comment:
Ash,
This is absolutely stunning...great work, i must say:-)
I mean, first of all..you took up such a difficult poem for translation ..that itself is commendable! So kudos on ur fab effort :-)
Keep writing...
Luv ya,
Priya
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