सोचती हूँ, मैं एक राह.……
में किस्से प्यार करू!!!
किससे अपना सफर बाटू .……
किसकी मंज़िल में बनु!!!
उस मोड़ से जो.……
खुद ठहर, मुझे बदलता....
नयी दिशा ,नया क्षितिज दिखता.…
पुराने जनाजों को धुन्दला कर
उम्मीद के नए मायने समझाता!!!
मगर मेरे आगे बढ़ने पर भी .…
....... वही रह जाता!!!!!
या उस चौराहे से जो.……
नये विकल्प, नयी मंज़िले दिखता.…
मुझ जैसी एक और से मिलता..... !!
दो पल के लिए एक सखी दिलाता.
सुख-दुख बाटने का अवसर दिलाता!!
मगर जो मेरे साथ-साथ
........ उसे भी उतना ही चाहता!!!!!
उस मक़ाम से प्यार करू.……
मेरे सफर की कहानी सुनाता
मेरे अग्रिम होने को दर्शाता!!!!
जो मेरे भुत में देख.…
भविष्य की बात करता!!!
मगर में आगे बढ़ते ही
……खुद बदल जाता!!!!
या उस मंज़िल से जो .……
मेरा जिना मुक्कमल है
मेरे अस्तित्व का एहसास है!!
मेरे सफर की जो इन्तहा है.…
और मेरे जीवन का अंतिम सच!!!
मगर उससे मिलन से ही
.…मेरा अंत हो जाता!!!
या उस राही से.…
जो मेरे निरंतर साथ चलता.……
मुझे पे अपने निशाँ छोड़ता जाता
मुझे सजाता-सवरताा सुन्दर बनाता.……
मगर जो मंज़िल के पाने पर
....... मुझे ही भूल जाता!!!!!!
राही, मोड़, मकाम, नज़ारे.……
है ये सभी फिर भी मेरे अपने!!
हमराह है मेरे बस.……
हमसफ़र कोई नहीं!!!
हमसफ़र कोई नहीं!!!
में किस्से प्यार करू!!!
किससे अपना सफर बाटू .……
किसकी मंज़िल में बनु!!!
उस मोड़ से जो.……
खुद ठहर, मुझे बदलता....
नयी दिशा ,नया क्षितिज दिखता.…
पुराने जनाजों को धुन्दला कर
उम्मीद के नए मायने समझाता!!!
मगर मेरे आगे बढ़ने पर भी .…
....... वही रह जाता!!!!!
या उस चौराहे से जो.……
नये विकल्प, नयी मंज़िले दिखता.…
मुझ जैसी एक और से मिलता..... !!
दो पल के लिए एक सखी दिलाता.
सुख-दुख बाटने का अवसर दिलाता!!
मगर जो मेरे साथ-साथ
........ उसे भी उतना ही चाहता!!!!!
उस मक़ाम से प्यार करू.……
मेरे सफर की कहानी सुनाता
मेरे अग्रिम होने को दर्शाता!!!!
जो मेरे भुत में देख.…
भविष्य की बात करता!!!
मगर में आगे बढ़ते ही
……खुद बदल जाता!!!!
या उस मंज़िल से जो .……
मेरा जिना मुक्कमल है
मेरे अस्तित्व का एहसास है!!
मेरे सफर की जो इन्तहा है.…
और मेरे जीवन का अंतिम सच!!!
मगर उससे मिलन से ही
.…मेरा अंत हो जाता!!!
या उस राही से.…
जो मेरे निरंतर साथ चलता.……
मुझे पे अपने निशाँ छोड़ता जाता
मुझे सजाता-सवरताा सुन्दर बनाता.……
मगर जो मंज़िल के पाने पर
....... मुझे ही भूल जाता!!!!!!
राही, मोड़, मकाम, नज़ारे.……
है ये सभी फिर भी मेरे अपने!!
हमराह है मेरे बस.……
हमसफ़र कोई नहीं!!!
हमसफ़र कोई नहीं!!!
1 comment:
Nice attempt
Few grammatical error....mein or main has different meaning
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